1991 में प्रधानमंत्री बने नरसिंह राव गैर नेहरू-गांधी परिवार के पहले व्यक्ति रहे, जिसने सत्ता में पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। हालांकि, सत्ता में आने के बाद से ही राजनीति के अपराधीकरण पर वोहरा रिपोर्ट, जैन हवाला कांड और तंदूर हत्याकांड जैसे मामलों से सरकार विवादों में आ गई थी। प्रधानमंत्री तक पर आरोप लगे। सात मंत्रियों के इस्तीफे हुए। 1996 के लोकसभा चुनाव आते-आते राव और कांग्रेस अपना तेज खोते गए।
चुनाव से पूर्व कई नेताओं ने कांग्रेस से अलग होकर पार्टियां बनाईं। इनमें- एनडी तिवारी की ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी), माधवराव सिंधिया की मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस, जीके मूपनार की तमिल मनीला कांग्रेस शामिल थीं। भ्रष्टाचार मुद्दा बना और कांग्रेस हार गई। 161 सीटें जीतकर भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। पहली बार लोकसभा में उसे कांग्रेस से ज्यादा सीटें भी मिलीं। अटल बिहारी वाजपेयी 13 दिन तक प्रधानमंत्री रहे, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस को 140 सीटें मिलीं, लेकिन उसने सरकार न बनाने का निर्णय लिया। हरकिशन सिंह सुरजीत व वीपी सिंह के प्रयासों से 13 से अधिक दलों के संयुक्त मोर्चा को कांग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया। चौधरी चरण सिंह, चंद्रशेखर के बाद इस बार देवेगौड़ा तीसरे प्रधानमंत्री बने, जिनकी सरकार को कांग्रेस ने समर्थन दिया। हालांकि समर्थन ज्यादा टिक नहीं पाया। कांग्रेस ने बिना किसी ठोस कारण देवेगौड़ा से समर्थन वापस लिया और संयुक्त मोर्चे के ही इंद्रकुमार गुजराल को समर्थन दे दिया।
राजीव गांधी हत्याकांड पर आई जैन आयोग की रिपोर्ट लीक होने के बाद कांग्रेस ने गुजराल से भी समर्थन ले लिया। इस तरह 1998 में देश में एक बार फिर मध्यावधि चुनाव हुए। 1996 के लोकसभा चुनावों में 8 राष्ट्रीय दल, 30 राज्य स्तरीय दल सहित 171 रजिस्टर्ड पार्टियां चुनाव लड़ीं। यानी पहली बार 200 से ज्यादा पार्टियां चुनावी मैदान में थीं। कुल 13,952 प्रत्याशी मैदान में थे। पहली बार उम्मीदवारों की संख्या 10 हजार के पार पहुंची थी। लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों के दबदबे की शुरुआत भी 1996 से हुई। इस बार क्षेत्रीय पार्टियों को 543 में से 129 सीटें मिलीं।
आडवाणी की सीट से वाजपेयी लड़े, जीते
कांग्रेस से अलग होकर कांग्रेस (तिवारी) पार्टी बनाने वाले दिग्गज नेता तिवारी और अर्जुन सिंह दोनों चुनाव हार गए। तिवारी झांसी से लड़े और पांचवें स्थान पर रहे। वहीं अर्जुन सिंह सतना से हार गए। अर्जुन सिंह को बसपा के सुखलाल कुश्वाह ने हराया। अर्जुन सिंह तीसरे स्थान पर रहे। चुनाव में तिवारी कांग्रेस के सिर्फ दो सांसद सतपाल महाराज और शीशराम ओला ही जीते।
राजीव गांधी हत्याकांड की जांच के लिए स्थापित जैन आयोग की रिपोर्ट आने के बाद कांग्रेस ने इंद्रकुमार गुजराल के नेतृत्व वाली संयुक्त मोर्चे की सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा की। जैन आयोग की अंतरिम रिपोर्ट लीक होने से इस बात का पता चला था कि डीएमके और इसके नेतृत्व की श्रीलंका के लिट्टे नेता वी. प्रभाकरन को प्रोत्साहन देने में भूमिका थी। हालांकि रिपोर्ट में राजीव गांधी की हत्या के संबंध में डीएमके के किसी भी नेता या किसी भी पार्टी का सीधे नाम नहीं था।
लालकृष्ण आडवाणी का नाम हवाला कांड में आने के बाद उन्होंने घोषणा की कि जब तक मैं निर्दोश साबित नहीं होता, तब तक चुनाव नहीं लडूंगा। इसके बाद उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र गांधीनगर से चुनाव नहीं लड़ा। वहां से अटल बिहारी वाजपेयी चुनाव लड़े। वाजपेयी लखनऊ से भी जीते। बाद में उन्होंने गांधीनगर सीट से इस्तीफा दे दिया।
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