Thursday, January 24, 2019

खत्म हुआ इंतजार, सलमान खान की सबसे बड़ी फिल्म भारत का टीजर रिलीज

अली अब्बास जफर के निर्देशन में बनी सलमान खान की महत्वाकांक्षी फिल्म भारत का टीजर रिलीज हो गया है. भारत इसी साल ईद के मौक पर रिलीज की जाएगी. वैसे टीजर से पहले ही सेट से सितारों के कुछ लुक्स सामने आए थे जो काफी वायरल भी हुए. फिल्म में सलमान खान कई किरदारों में नजर आएंगे. सलमान खान के साथ कटरीना कैफ, सुनील ग्रोवर, दिशा पाटनी भी अहम भूमिकाओं में हैं. भारत कोरियन मूवी ''ओड टू माई फादर'' पर आधारित बताई जा रही है.

टीजर में सलमान की दमदार डायलॉग के साथ धमाकेदार एंट्री दिखाई गई है. वे रॉकस्टार लुक में नजर आ रहे हैं. बाइक से सलमान खान एंट्री करते नजर आ रहे हैं. टीजर में एक्टर को कई लुक्स में दिखाया गया. वे माइनर, स्टंटमैन, नेवी ऑफिसर, बॉक्सर और मिडिल एज शख्स के लुक में नजर आते हैं. सलमान के कैरेक्टर का नाम भारत है. टीजर में दबंग खान को ही प्राथमिकता दी गई है. 1 मिनट 26 सेकंड का टीजर प्रभावी है, लेकिन इसमें कटरीना, दिशा पाटनी, सुनील ग्रोवर या दूसरे कलाकार नजर नहीं आते.

टीजर में सलमान की आवाज में एक दमदार सवांद भी है. सलमान कहते हैं, "अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि मेरा सर नेम क्या है, जाति क्या है, धर्म क्या है. और मैं उनसे मुस्कुराकर कहता हूं कि इस देश के नाम पे मेरे बाबूजी ने मेरा नाम भारत रखा है. अब इतने बड़े नाम के आगे जाति, धर्म, सरनेम लगा के न तो अपना न इस देश का मान कम कर सकता हूं."

छोटे से टीजर में सलमान का जबरदस्त अवतार नजर आता है. टीजर का बैकग्राउंड स्कोर लाजवाब है. सलमान की आवाज, बैकग्राउंड स्कोर और इस पर जो सीन्स बुने गए हैं वो बेहद प्रभावी हैं. भारत में ऑडियंस को जबरदस्त एक्शन देखने को मिल सकता है. टीजर के आधार पर कहा जा सकता है कि फिल्म देशभक्ति के जज्बे और मनोरंजन के मसाले से भरपूर है.

पहली बार किसी फिल्म में सलमान खान के कई शेड्स देखने को मिलेंगे. इससे पहले सलमान ने जुड़वा में डबल रोल किया था. उनका एक किरदार सीधा सादा जबकि दूसरा टपोरी किस्म का था. जुड़वा बॉक्स ऑफिस की बड़ी हिट थी, जिसे डेविड धवन ने बनाया था.

दबंग खान के फैंस के लिए ये फिल्म ईद का नायाब तोहफा कही जा है. सोशल मीडिया पर भी भारत के टीजर को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है. बता दें, मूवी में पहले कटरीना कैफ की जगह प्रियंका चोपड़ा को लिया गया था. लेकिन निक जोनस संग शादी की व्यस्तता के चलते प्रियंका ने फिल्म छोड़ दी थी. जिसके बाद कटरीना कैफ को साइन किया गया.

किशनलाल पढ़े लिखे नहीं थे. उनके घर के दरवाज़े पर शिक्षित भारत का स्टिकर लगा हुआ था. इस शिक्षित भारत स्टिकर की संभावनाएं किशनलाल के बच्चों की आंसू वाली आंखों में तब नज़र आती है, जब वो कहते हैं, ''पापा चाहते थे हम उनकी तरह कभी न बनें. पापा हमें खूब पढ़ने के लिए कहते थे, वो चाहते थे कि हम भाई-बहन उनके जैसा काम न करें और एक दिन बड़ा अफ़सर बनें.''

किशनलाल की पत्नी इंदु देवी अपने तीन बच्चों और पड़ोस की औरतों के साथ लगभग 6x8 की झुग्गी में बैठी हुई थीं. इस परिवार में कमाई का इकलौता ज़रिया रहे किशनलाल के दुनिया से जाने का दुख इस छोटी झुग्गी में ज़्यादा बड़ा जान पड़ता है. ग़रीबी, लाचारी, अपने की मौत का दुख और भविष्य की चिंता.

2019 के भारत में किसी आदमी की नाले साफ़ करते हुए जान चली गई. ये सोचकर प्यासा फ़िल्म में साहिर लुधयानिवी का लिखा गाना याद आता है- ज़रा इस मुल्क के रहबरों को बुलाओ, ये कूचे ये गलियां ये मंज़र दिखाओ. जिन्हें नाज़ है हिन्द पर उनको लाओ. जिन्हें नाज़ है हिंद पर वो कहां हैं...कहां हैं...कहां हैं. कहां हैं?

Thursday, January 17, 2019

BJP के राष्ट्रीय महासचिव रामलाल की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्‍ट्रीय महासचिव (संगठन) रामलाल की तबियत खराब होने के कारण अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है, शुरुआती जानकारी के मुताबिक उन्‍हें काफी तेज बुखार की बात सामने आई है. फिलहाल, नोएडा के कैलाश हॉस्‍पि‍टल में उनका इलाज जारी है.

बता दें कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को स्वाइन फ्लू की शिकायत के चलते बुधवार को ही दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया है. उनका भी इलाज एम्‍स में जारी है.

गौरतलब है कि हाल के वक्‍त में बीजेपी नेताओं की सेहत में गिरावट और बीमारी की चपेट में आने के मामले लगातार सामने आए हैं. इनमें ज्‍यादातर पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं.

इन नेताओं में रामलाल और अमित शाह के अलावा गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर, केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, रविशंकर प्रसाद और नितिन गडकरी शामिल हैं. मनोहर पर्रिकर कैंसर से जूझ रहे हैं. वहीं, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज का किडनी ट्रांसप्लांट कियाजा चुका है. बीते दिनों नितिन गडकरी शुगर का स्‍तर लो होने के कारण बेहोश हो गए थे.

बीते मंगलवार को केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को सीने में दर्द के कारण एम्स में ही एडमिट कराया गया था. इसके अलावा बीमारी के कारण पिछले साल केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार का निधन हो गया था.

रविशंकर प्रसाद

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को सांस लेने वाली नली में दिक्कत के बाद बीते सोमवार को एम्स में भर्ती कराया गया था.  बुधवार को प्रसाद को एम्स के आईसीयू से प्राइवेट वार्ड ट्रांसफर किया गया है. उनकी हालत में सुधार के बाद गुरुवार को अस्‍पताल से छुट्टी दे दी गई है.

मनोहर पर्रिकर

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर कैंसर से जंग लड़ रहे हैं. पर्रिकर अग्नाशय संबंधी बीमारी से ग्रसित हैं. पर्रिकर ने साल 2018 की शुरुआत में करीब तीन महीने तक अमेरिका में इलाज कराया था. इसके बाद दिल्ली के एम्स में भी उनका इलाज चला था. वह करीब 11 महीने सेबीमार चल रहे हैं. नए साल के पहले दिन वह ड्रिप लगाकर सचिवालय पहुंचे थे.

अरुण जेटली

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की सेहत कुछ ठीक नहीं है. अप्रैल, 2018 में उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां वह डायलसिस पर थे और बाद में 14 मई, 2018 को उनका किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था. इस दौरान जेटली की गैरमौजूदगी में वित्त मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारीरेलमंत्री पीयूष गोयल को सौंपी गई थी.

इससे पहले सितंबर, 2014 में जेटली ने वजन कम करने वाली बैरियाट्रिक सर्जरी कराई थी. उन्होंने यह सर्जरी दिल्ली के मैक्स अस्पताल में कराई थी, लेकिन कुछ जटिलताओं की वजह से बाद में उन्हें एम्स में भर्ती कर दिया गया था. कुछ साल पहले वह हॉर्ट की भी सर्जरी करा चुकेहैं.

सुषमा स्वराज

केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपनी खराब सेहत के कारण आगामी चुनाव न लड़ने का ऐलान किया है. दरअसल, साल 2016 में खराब तबीयत के कारण सुषमा को एम्स में एडमिट होना पड़ा था. इसके बाद उन्होंने एक ट्वीट करके सबको चौंका दिया था. इस ट्वीट में उन्होंने कहाथा कि उनकी किडनी फेल हो गई है और वह डायलिसिस पर हैं. बाद में उनकी किडनी ट्रांसप्लांट की गई. इसके बाद से सुषमा सार्वजनिक मंचों पर कम ही नजर आती हैं.

नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की भी तबीयत खराब चल रही है. पिछले महीने वह एक कार्यक्रम के दौरान बेहोश होकर गिर पड़े थे. उनका शुगर लेवल लो हो गया था. इससे पहले वह दिल्ली में संसद मार्च के दौरान बेहोश होकर गिर पड़े थे. इस दौरान वह बीजेपी के राष्ट्रीयअध्यक्ष थे.

अनंत कुमार

बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री रहे अनंत कुमार का नवंबर में निधन हो गया था. दरअसल, 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान अनंत कुमार बीमार थे. चुनाव खत्म होते ही, जब उन्होंने डॉक्टरों से इलाज कराया तो पता चला कि उन्हें फेफड़ों का कैंसर है. इसकेसात महीने के बाद उनकी मौत हो गई थी.

जम्मू से दिल्ली आ रही दुरंतो एक्सप्रेस में चाकू की नोक पर लूटपाट

जम्मू से दिल्ली आ रही दुरंतो एक्सप्रेस में गुरुवार को अज्ञात लुटेरों ने लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया. जब ट्रेन बादली स्‍टेशन के पास 15 मिनट के लिए सिग्नल न मिलने के कारण रुकी थी. उसी दौरान बदमाशों ने ट्रेन के यात्रियों से नगदी, जूलरी और मोबाइल फोन लूट लिए.

जानकारी के मुताबिक, दुरंतो एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12266) के B3 और B7 में यात्रियों के साथ करीब 3 बजे ये लूट की गई. पीड़ित यात्रियों की शिकायत पर सब्जी मंडी जीआरपी पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच में जुट गई है.

रेन में यात्रा कर रहे पीड़ित यात्री ने बताया कि आज ज‍ब हम दुरंतो एक्‍सप्रेस( ट्रेन नंबर-12266) में सफर कर रहे थे. इस ट्रेन का केवल सोर्स और डेस्टिनेशन स्टेशन पर ठहराव है. ट्रेन को सुबह 4:20 बजे दिल्ली पहुंचना था. सुबह 3:30 बजे जब ट्रेन दिल्ली के पासकहीं खड़ी हुई तो ट्रैक सिग्नल साफ न होने के कारण ट्रेन को रोका गया था.

अचानक करीब 7 से 10 अज्ञात बदमाशों ने ट्रेन के कोच B3 और B7 में प्रवेश किया. उनके हाथों में तेज धार वाले चाकू थे. बदमाशों ने चाकू को यात्रियों की गर्दन पर रखा और पूछा कि जो भी महंगा सामान वे अपने साथ ले जा रहे हैं उसे सौंप दें. उन्होंने कई पैसेंजरों सेपर्स, नकदी, बैग, सोने की चेन, मोबाइल और कई अन्य सामान लूट लिए. यह घटना 10 से 15 मिनट के भीतर हो गई. 

यात्री ने आरोप लगाया कि वारदात के समय न तो स्टाफ और न ही सुरक्षाकर्मी वहां मौजूद थे. हमने हिम्‍मत कर ट्रेन अटेंडेंट और टीटी तक पहुंचने की कोशिश की.

अटेंडेंट अपन जगह पर मौजूद नहीं था और वह ट्रेन में कहीं और सो रहा था. हमने टीटी को खोजने की कोशिश की, लेकिन टीटी नहीं मिला. करीब 20 मिनट बाद हम अटेंडेंट को ढूंढ सके.

पीड़ित यात्री के मुताबिक, मैंने 100 नंबर डायल कर पुलिस को मामले की सूचना दी. दिल्ली पुलिस जब पहुंची तब तक ट्रेन स्टेशन पर पहुंच चुकी थी. उन्होंने घटना की एफआईआर दर्ज की है.

यात्री की शिकायत है कि इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है? हम इस ट्रेन के लिए रेलवे की गतिशील किराया नीति के चलते अतिरिक्त किराए का भुगतान करते हैं. और हमें बदले में क्या सुविधा मिल रही है.

यात्री की मानें तो अटेंडेंट ने हमें बताया कि ट्रेन में कोई सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं था. क्या रेलवे ट्रेनों में सुरक्षा मुहैया कराने के लिए किसका इंतजार कर रहा है. हम एसी कोचों में भी सुरक्षित नहीं हैं और स्लीपर क्लास और सामान्य कोच में सुरक्षा की उम्‍मीदकरते हैं.

यात्रियों का सवाल है कि रेलवे हमसे किस बात का महंगा किराया वसूल रहा है. ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर हम फ्रिक्रमंद हैं.

वहीं, रेलवे सूत्रों के मुताबिक, रेलवे प्रोटेक्‍शन फोर्स को शुरुआती तौर पर कुछ सुराग हाथ लगे हैं. जिनके आधार पर ट्रेन में लूट आरोपियों को जल्‍द से जल्‍द पकड़ लिया जाएगा और आगे की कार्रवाई की जाएगी.

Wednesday, January 9, 2019

Xiaomi Redmi Y2 अब 3,000 रुपये के डिस्काउंट पर मिल रहा है

नए साल की शुरुआत के साथ चीनी टेक कंपनी शाओमी ने अपने स्मार्टफोन्स की कीमतें कम करनी शुरू की हैं. पहले Mi A2 फिर Redmi Note 5 Pro और अब Redmi Y2 को सस्ता किया गया है. कंपनी ने Redmi Y2 को 3,000 रुपये डिस्काउंट के साथ बेचने का ऐलान किया है.

कीमत कम होने के बाद अब कस्टमर्स Redmi Y2 के 4GB रैम और 64GB मेमोरी वेरिएंट को 10,999 रुपये में खरीद सकते हैं. इसकी असल कीमत 13,999 रुपये है. आपको बता दें कि इसके शुरुआती वेरिएंट में 3GB रैम के साथ 32GB इंटरनल मेमोरी दी गई है और इसे आप 8,999 रुपये में ही खरीद सकते हैं.

Redmi Y2 को आप ऐमेजॉन और Mi.com सहित ऑफलाइन स्टोर्स से खरीद सकते हैं. शाओमी इंडिया हेड और ग्लोबल वाइस प्रेसिडेंट मनु जैन के मुताबिक अभी दो और बड़े ऐलान बचे हैं जो जल्द ही किए जाएंगे. 

गौरतलब है कि Xiaomi Redmi Y2 भारत में पिछले साल ही लॉन्च हुआ था. कंपनी ने Y सिरीज सेल्फी आधारित स्मार्टफोन के लिए लाया था. इस स्मार्टफोन में 16 मेगापिक्सल सेल्फी कैमरा है और डुअल रियर कैमरा है. स्पेसिफिकेशन्स की बात  करें तो इसमें क्वॉल्कॉम स्नैपड्रैगन 625 ऑक्टाकोर प्रोसेसर दिया गया है.

इस स्मार्टफोन में 5.99 इंच की फुल एचजी डिस्प्ले है और इसकी बैटरी 3,080mAh की है. इसके रियर पैनल पर फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया गया है और कनेक्टिविटी के लिए स्टैंडर्ड फीचर्स हैं. इनमें डुअल सिम, 4G LTE, VoLTE सपोर्ट, वाईफाई, ब्लूटूथ और माइक्रो यूएसबी कनेक्टर शामिल हैं. इस स्मार्टफोन में सेल्फी कैमरा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड फेस अनलॉक फीचर भी दिया गया है.

आपको बता दें कि राजद ने लोकसभा में भी इस बिल का विरोध किया था. मंगलवार को हुई वोटिंग में तीन वोट बिल के विपक्ष में पड़े थे. इनमें एक वोट असदुद्दीन ओवैसी, दो सांसद राजद के शामिल थे. जबकि AIADMK के सांसदों ने वोटिंग से पहले ही सदन से वॉकआउट कर दिया था. राज्यसभा में AIADMK के 13 सांसद हैं.

लोकसभा में लंबी बहस के बाद पास हुआ बिल

मंगलवार को लोकसभा में 5 घंटे से भी अधिक की बहस के बाद लोकसभा में संविधान संशोधन बिल पास हुआ. बहस में वित्त मंत्री अरुण जेटली, AIMIM असदुद्दीन ओवैसी, AIDMK के एम. थंबीदुरई समेत कई बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया. बहस के बाद हुई वोटिंग में कुल 326 सांसदों ने हिस्सा लिया, इसमें 323 सांसदों ने बिल के पक्ष में और 3 लोगों ने विपक्ष में वोट दिया.

क्या है मोदी सरकार का फैसला?

आपको बता दें कि नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने सोमवार को ही सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया. इसके तहत जिन लोगों को अभी तक आरक्षण का लाभ नहीं मिलता था अर्थात जो अनारक्षित श्रेणी में आते थे उन लोगों को इस फैसले का सीधा लाभ मिलेगा. ये लाभ सरकारी नौकरी और शैक्षणिक क्षेत्र में मिलेगा.

Tuesday, January 1, 2019

विपक्ष ही नहीं, 2019 में पीएम मोदी का मुकाबला मोदी से भी है

अकबर ने बीरबल से एकबार कहा था कि वो कागज़ पर बनी एक लकीर को बिना काटे या मिटाए छोटा करके दिखाए. बीरबल ने उस लकीर के समानान्तर एक बड़ी लकीर खींच दी और इस तरह अकबर की लकीर छोटी हो गई. दरबार के रंकों के सामने पेश की गई यह चुनौती आज खुद बादशाहों के गले आ पड़ी है और स्थिति यह है कि लकीर के समानान्तर बड़ी लकीर खींच पाने की सारी कोशिशें नाकाफी साबित होती नज़र आ रही हैं.

देश के प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी के लिए वर्ष 2019 एक बेहद चुनौतीपूर्ण साल है. यह चुनौती 2013 में मोदी के उदय के समय की तुलना में कहीं अधिक कठिन नज़र आ रही है. 2013 में मोदी ने सितंबर के महीने में भाजपा का प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनने के बाद प्रचार के रथ खोल दिए थे. भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी एक 10 साल पुरानी सरकार के सामने सपनों और उम्मीदों की थ्री-डी फिल्म दिखाने वाला एक जादूगर खड़ा था. इसके पास सपनों की पोटली थी. वादे थे. जो नहीं हुआ है, उसे कर दिखाने का संकल्प था.

एक आइना था जिसमें देखने पर सब अच्छा-अच्छा दिखता था. लोग इस आइने को गुजरात मॉडल कहते हैं. अच्छे अक्स दिखाने वाले इस जादुई आइने पर लोगों ने यकीन किया और उसके बिंबों को सच मानकर उसमें अपनी बदली हुई तस्वीर को देखकर मुग्ध होने लगे. नारा उछला- अच्छे दिन आने वाले हैं.

राजनीति की नदी के एक किनारे से विश्वास खोती जनता को दूसरे किनारे की सजावट अच्छी लग रही थी. मोदी का प्रचार धीरे-धीरे लहर बनता जा रहा था और उस लहर के सामने राजनीति के तमाम कुनबे कमज़ोर पड़ते चले गए. इसी प्रचार और प्रबंधन से लैस मोदी लहर की बदौलत देश में आज़ादी के बाद से पहली बार एक बहुमत वाली ग़ैर-कांग्रेस सरकार का अस्तित्व देखने को मिला और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने.

ध्वस्त होता तिलस्म

लेकिन 2019 की पहली सुबह तक साढ़े चार साल से ज़्यादा अरसा बीत चुका है. लोग अब तक रोटी की आस में थाली भर पानी में चांद की परछाई देख रहे हैं. जादू का तिलिस्म कमज़ोर पड़ रहा है. गुजराती आइने कसौटियों पर खरा उतरने के बजाय गर्द और दागों से धुंधला होता जा रहा है.

इस दौरान दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति कमज़ोर हुई है. वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को मानने और जताने का काम दूसरे देश नहीं, खुद भारत करने में लगा है. प्रधानमंत्री के पास अनगिनत विदेश यात्राओं की सूची है, लेकिन उसके मुकाबले उपलब्धियां बहुत कम. पाकिस्तान के भारत पर हमले न तो मोदी के भाषणों से कम हो पाए हैं और न ही उनके चाय पीने और गले मिलने से.

महंगाई का सवाल सुरसा के मुंह की तरह और विकराल होता गया है. डीजल के दामों ने किसानों की कमर तोड़ दी है. गांवों में बिजली तो पहुंची है, लेकिन बिजली के दाम आसमान पर हैं. खाद और बीज के लिए रो रहे किसानों के लिए फसल बीमा के वादे सतही और सस्ते साबित हुए हैं. अन्नदाता की आत्महत्या कम होने के बजाय लगातार जारी है.

रोज़गार सृजन में सरकार अपने वादे से कोसों दूर है. नोटबंदी ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी और असंगठित क्षेत्र से लेकर कुटीर उद्यमियों तक के लिए नोटबंदी वज्र की तरह घातक साबित हुई है. कालाधन और भ्रष्टाचार पर नकेल के वादे चारों खाने चित्त नज़र आ रहे हैं. मोदी सरकार की उपलब्धियों का कालपात्र रिसती हुई गागर बनकर रह गया है.

यह बेवजह नहीं है कि पहले प्रधानमंत्री के खिलाफ एक शब्द न सुनने को राज़ी जनता अब आलोचना के कड़वे बोल बोलने लगी है. राजस्थान, पंजाब, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और दिल्ली में जनता पहले ही मोदी मॉडल को खारिज कर चुकी है. कांग्रेस मुक्त भारत का सपना अपने अंतिम लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही धराशायी हो गया है.