नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट की आतंरिक जांच समिति ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर लगे यौन शोषण के आरोपों को खारिज कर दिया। समिति ने कहा कि पूर्व महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों में कोई आधार नहीं है। समिति ने कहा कि मामले की जांच के दौरान हुई कार्यवाही की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। इससे पहले महिला इस समिति के सामने पेश होने सेे इनकार कर चुकी है। महिला ने कहा था कि इस समिति से मुझे इंसाफ की उम्मीद नहीं है।
चीफ जस्टिस पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा
सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने चीफ जस्टिस पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट की इन हाउस कमेटी कर रही थी। कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस बोबडे के अलावा दो महिला जज- जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी भी थीं। आरोप लगाने वाली महिला कमेटी के सामने पेश हुई थी, लेकिन बाद में मीडिया में बयान दिया था कि अगर उसे वकील ले जाने की इजाजत नही दी गई तो वह जांच में हिस्सा नहीं लेगी। महिला का कहना था कि मुझे यहां इंसाफ की उम्मीद कम दिखाई देती है।
जूनियर कोर्ट असिस्टेंट थी आरोप लगाने वाली महिला
सीजेआई गोगोई पर 35 साल की महिला ने यौनशोषण के आरोप लगाए थे। उसने एफिडेविट की कॉपी 22 जजों को भेजी थी। यह महिला 2018 में सीजेआई के आवास पर बतौर जूनियर कोर्ट असिस्टेंट पदस्थ थी। बाद में उसे नौकरी से हटा दिया गया।
चंद्र शेखर जोशी ने प्रतिक्रिया दी, ''पांच साल अगर कुछ काम किया होता तो ये सब कहने की ज़रूरत न होती.''
उमेश चंद्र लिखते हैं, ''ऐसा हर शख़्स जो कभी राजीव गांधी से मिला होगा वो ये ज़रूर मानेगा कि राजीव एक कमाल की शख्सियत थे.''
हालांकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मोदी के राजीव गांधी पर दिए बयान को सही ठहरा रहे हैं.
द ओल्ड मोंक नाम के यूज़र ने ट्वीट किया, ''सच्चाई थोड़ी कड़वी होती है. राहुल गांधी को देर से समझ आई.''
अमर राजपूत ने लिखा, ''अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री के लिए 'चौकीदार चोर है' जैसी बात कर सकते हैं तो उन्हें अपने पिता को भी देखना चाहिए कि वो क्या कर चुके थे.''
निखिल मिश्रा लिखते हैं, ''कुछ ग़लत नहीं बोला. राजीव गांधी का दामन साफ़ नहीं था. मौत न तो आपको महान बना सकती है और न ही आपके कर्मों पर पर्दा डाल सकती है.''
नरेश कुमार ने लिखा, ''मोदी जी कभी भी झूठ नहीं बोलते. उन्होंने कहा है तो सही ही कहा होगा.''
मृणाली वर्मा लिखती हैं, ''मोदी ने जो कुछ भी कहा है. सही कहा है. कुछ भी ग़लत नहीं कहा.''
भूपेंद्र सिंह ने लिखा, ''मेरी देशवासियों से गुजारिश है कि पहले अच्छे से इतिहास की पढ़ाई कर लें. तब किसी को लेकर अपना कोई नज़रिया बनाएं.''
64 करोड़ रुपए की कथित रिश्वत के बोफोर्स मामले में दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राजीव गांधी पर कोई आरोप साबित नहीं हो पाया.
राजीव गांधी की मौत के बाद वीपी सिंह वाले जनता दल मोर्चे के क़रीब तीन और उसके बाद वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी के क़रीब पांच साल के शासन में इस मामले में ऐसा कुछ साबित नहीं हो पाया था.
वाजपेयी की सरकार के दौरान ही राजीव गांधी का नाम बोफोर्स की चार्जशीट से हटाया गया था.
अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करने वाले मोदी आज भले ही राजीव गांधी पर हमला कर रहे हैं. लेकिन इन दो दिवंगत नेताओं के बीच कैसे रिश्ते रहे थे, इसकी झलक आपको उल्लेख एनपी की किताब द अनटोल्ड वाजपेयी में मिल सकती है.
किताब में वाजपेयी के एक इंटरव्यू के हवाले से इस बारे में जानकारी दी गई है.
वाजपेयी के मुताबिक़, 'जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे, तब उन्हें पता चला कि मुझे किडनी की दिक़्क़त है. एक दिन उन्होंने मुझे अपने दफ़्तर बुलाया और कहा कि वो मुझे संयुक्त राष्ट्र में भेजे जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल कर रहे हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि मैं इस मौक़े का इस्तेमाल अपने इलाज के लिए करूंगा. मैं न्यूयॉर्क गया. ये एक वजह है, जिसके चलते आज मैं ज़िंदा हूं.''
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